यादों के टुकड़े एक शून्य में तैरते हैं — बचपन का कमरा, बरसाती सड़क पर पहला चुंबन, स्नातक समारोह, दादी की रसोई। हर टुकड़ा तैरती हुई छवि है, किनारे पुरानी तस्वीरों की तरह मुड़े हुए। वे शून्य में धीरे-धीरे घूमते हैं, मंद चमक से जुड़े। कैमरा: टुकड़ों के बीच तैरता है। प्रकाश: शून्य में कोमल आभा। शैली: प्रयोगात्मक काव्य। अवधि: 12 सेकंड।