बारिश पोखरों से उल्टी ऊपर की ओर गिरती है, वापस बादलों में। हर बूँद एक छोटा लेंस है जो पीछे छूटते संसार को बड़ा करती है। लोग सड़क पर चलते हैं, उनके सिरों के ऊपर पानी का परदा धीरे-धीरे उठता है। बूँदें ऊपर चढ़ती हैं, उल्टी धाराएँ बनाती हैं। कैमरा: एक बूँद की ऊपर की यात्रा का पीछा। प्रकाश: बारिश के बाद का आकाश। शैली: सर्रियल काव्य। अवधि: 10 सेकंड।